कोरोना माँगे मोर : Possible है Lockdown 4

News Desk
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Metro India News: लॉकडाउन 3.0 की मियाद रविवार 17 मई को खत्म हो रही है। अभी कोरोना वायरस (Coronavirus) जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए लॉकडाउन को 31 मई तक बढ़ने की आशंका जाहिर हो रही है। हालाँकि पिछले दिनो प्रधानमंत्री श्री मोदी के जनता के नाम संबोधन से भी यही प्रतीत हो रहा था कि लॉकडाउन 4.0 (Lockdown 4.0) संभव है।

15 मई तक गृहमंत्रलया ने सभी राज्य के मुख्यमंत्रियों से अपने अपने राज्य के हिसाब से उनके सुझाव माँगे थे। उसके उपरांत लॉकडाउन 4.0 की गाइडलाइंस के ऐलान से पहले गृह मंत्री अमित शाह की बैठक हुई। मंत्रालय के अधिकारियों के साथ गृह मंत्री अमित शाह ने कई घंटे बैठकें की। जैसा कि आपको पता है कि राज्यों की तरफ से गाइडलाइंस पर सुझाव देने का कल आखिरी दिन था। जानकारी के अनुसार ये बैठक अमित शाह ने 18 मई से शुरू हो रहे है लॉकडाउन 4.0 को लेकर रणनीति तैयार करने के मकसद से की। राज्यों से मिले सुझावों पर विचार करने के बाद गृह मंत्रालय गाइडलाइंस जारी करेगा।

अनुमान लगाया जा रहा है कि लॉकडाउन4.0 में अर्थव्यवस्था पर ज़ोर दिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक- ग्रीन ज़ोन में इंडस्ट्री को मंजूरी संभव है। वहीं, श्रमिक ट्रेनों की संख्या बढ़ सकती है। और अंदेशा ये भी है कि चुनिंदा रूट पर उड़ानें भी चालू की जा सकती है।

लॉकडाउन-4 पर केजरीवाल सरकार ने पीएम मोदी को सुझावों की लिस्ट भेजी। जानकारी के अनुसार केजरीवाल ने ये अपील की है कि सरकारी और ज़रूरी सेवाओं में लगे लोगों के लिये मेट्रो चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने ये भी कहा कि मॉल और सैलून बंद ही रखे जाएं।

उम्मीद की जा रही है कि नीचे दिए हुए कुछ बंदिशो के साथ लॉकडाउन 4.0 को 18 मई से 31 मई तक बढ़ाया जा सकता है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ऑटो रिक्शा और कैब एग्रीगेटरों को शर्तों के साथ इजाजत दी जा सकती है। उन्हें अधिकतम 2 यात्रियों को बैठाने की अनुमति दी जा सकती है।

अगर राज्यों की आपसी सहमति बनती है तो घरेलू उड़ानों को भी मंजूरी दी जा सकती है। केंद्र तो सभी घरेलू उड़ानों को शुरू करना चाहता है लेकिन कई राज्य इसके विरोध में हैं।

रेड जोन्स में मेट्रो सर्विसेज को आगे भी सस्पेंड रखा जा सकता हालाँकि दिल्ली सरकार ने मेट्रो सर्विसेस को खोलने की अनुशंसा की है।
कंटेनमेंट जोन्स में और ज्यादा सख्ती हो सकती है। किस जोन में किन गतिविधियों की इजाजत रहे, इसे तय करने का अधिकार राज्यों को मिल सकता है।

अब तक केंद्र सरकार ही रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन तय करती रही है। इसमें बदलाव भी केंद्र ही कर सकता है। हालांकि, राज्य मांग कर रहे हैं कि उन्हें जोन तय करने और किस जोन में किन तरह की गतिविधियों को इजाजत रहे, यह तय करने का अधिकार उन्हें मिले।

प्रवासी मजदूरों की समस्या को दूर करने के लिए राज्यों को नई गाइडलाइंस में स्पष्ट निर्देश होगा कि वे लॉकडाउन में फंसे मजदूरों की मदद कर सकें।

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